देश के आठ दशक की राजनीति में दलित मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक बन चुके हैं पर प्रधानमंत्री की दावेदारी में वह अभी भी बहुत पीछे खड़े हैं। आपातकाल के बाद एक बार अवश्य अवसर बना किसी दलित के प्रधानमंत्री बनने का पर एक बहुत बड़े साजिश से वह पूरा होते-होते रह गया। आज राजनीति में कोई 15 -20 साल विधायक और सांसद बन जाता है तो उसे कद्दावर नेता माना जाता है। पर आज भी भारतीय लोकतंत्र में जिस नेता के पास सबसे ज्यादा समय तक सदन का सदस्य होने का रिकॉर्ड हैं वह है भारतीय राजनीति के 'बाबू जी' बाबू जगजीवन राम। वह भारतीय सदन में लगभग 50 साल तक लगातार सदन के सदस्य बने रहे हैं। ऐसा तिलिस्म आज भी किसी के पास हासिल नहीं है जो उनके रिकॉर्ड तक पहुंच सके। ऐसे में जाहिर है जो व्यक्ति गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और उप प्रधानमंत्री तक रह चुका हो वह प्रधानमंत्री का सपना जरुर देखेगा। और वह स्वप्न भी लगभग पूरा ही हो चूका था लेकिन एक विशाल राजनीतिक षड्यंत्र की वजह से वह कभी पूरा न हो सका।
आपातकाल के बाद जयप्रकाश नारायण की जनता दल की गुटबंदी के प्रमुख नेता थे जगजीवन राम । कांग्रेस में उन्हें वह सब कुछ मिला जिसके वह हकदार थे। कांग्रेस ने उनके कंधे पर खड़े होकर दशकों दलित राजनीति की, ऐसे में जगजीवन राम और राज नारायण को भी लगा की क्यों न जगजीवन राम भी एक बार प्रधानमंत्री बने। चुनावों के दौरान जयप्रकाश नारायण और अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि जगजीवन राम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री बनेंगे । कांग्रेस से उनके इस्तीफे को "जे-बम" कहा गया जिसने कांग्रेस पार्टी को हिलाकर रख दिया था ।
इंदिरा हटाओ के नारे के पीछे जनता पार्टी की यही मनसा थी( जगजीवन राम को प्रधानमंत्री का स्वप्न दिखाकर ) परंतु जब 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी तो एक बार फिर जगजीवन राम(दलित) को पीछे कर मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री बनाया गया और उन्हें उप प्रधानमंत्री बनाकर संतुष्ट कर दिया गया । जिससे पार्टी में असंतोष बना रहा। यह बात जय प्रकाश और मोरार जी को खटक रही थी ऐसे में 1978 में भारत का पहला सेक्स स्कैण्डल सामने आया । 20 अगस्त 1978 को दिल्ली के मोहन नगर में एक कार दुर्घटना हुई । सुरेश राम (जगजीवन राम के बेटे ) अपनी मर्सिडीज बेंज कार चला रहे थे, जिसमें उनकी गर्लफ्रेंड सुश्मा चौधरी (21 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा, मेरठ के एक जाट परिवार से) भी सवार थी । कार ने एक व्यक्ति को टक्कर मार दी, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घबरा गए सुरेश ने कार मोहन मीकिन्स फैक्ट्री के कैंपस में छोड़ दी और सुश्मा के साथ पैदल भाग निकले । फैक्ट्री मैनेजर अनिल बाली ने उन्हें पहचान लिया उन्हें और सुरक्षित जगह पर छिपा दिया । कहा जाता है सुरेश की कार का पीछा जनता पार्टी के दो कार्यकर्ता, केसी त्यागी (राज नारायण के करीबी) और ओमपाल सिंह (चौधरी चरण सिंह के करीबी), कर रहे थे । उन्होंने कार की तलाशी ली, तो अंदर 40-50 अश्लील तस्वीरें मिलीं जिनमें सुरेश और सुश्मा की अंतरंग पोज़ में नग्न तस्वीरें थीं । ये तस्वीरें कथित रूप से सुरेश के सहयोगी एपी सिंह ने ली थीं । बाद में ये तस्वीरे बहुत बड़े राजनीतिक षडयंत्र का हिस्सा बनी और इंदिरा गाँधी ,संजय गाँधी ,मेनका गाँधी तथा राज नारायण एवं मोरार जी ने इसे सूर्या पत्रिका ,नेशनल हेराल्ड में प्रकाशित करवा के जगजीवन राम के प्रधानमंत्री बनने के स्वप्न को ही जड़ से समाप्त कर दिया । आज जब देश में शिथिल हो चुकी दलित राजनीति थोड़ी चौकन्नी हुई है तो फिर एक नया षड्यंत्र रचा जा रहा है ।
वर्तमान में जो आरोप प्रत्यारोप चर्चा में है वह है इस वक्त देश के सबसे चर्चित लोकप्रिय दलित नेता चंद्रशेखर आजाद और रोहिणी घावरी का विवाद । पिछले कई महीनो से रोहिणी नगीना सांसद चंद्रशेखर पर कई संगीन आरोप लगा रही है। रोहिणी का कहना है कि चंद्रशेखर ने उनके साथ पहले शारीरिक संबंध बनाएं, उन्हें देश का बड़ा दलित नेता बनाने की लालच दी और कई बड़े सपने दिखाए। वह अपने और चंद्रशेखर के संबंध पर कह रही हैं कि उन्हें पता नहीं था कि चंद्रशेखर शादीशुदा व्यक्ति है। यह आरोप एक साधारण औरत या साधारण लड़की लगाती तो शायद मान भी लिया जाता लेकिन रोहिणी एक पढ़ी-लिखी कुशल और समाजसेविका है। उन्हें 2019 में एक करोड़ का प्रवासी भारतीय छात्रवृत्ति भी प्रदान हो चुका है। इस राशि से उन्होंने स्विट्जरलैंड से बिजनेस मैनेजमेंट से पीएचडी की और अब वही अपना सामाजिक कार्य कर रही हैं। मार्च 2023 में इन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संघ में भाषण देकर देश भर में सुर्खियां प्राप्त की थी।मजेदार बात यह है कि एक दलित होने के बावजूद अपने भाषण की शुरुआत इन्होने जय श्री राम कहते हुए की थी (आम तौर पर दलित वैचारिकी रखने वाले ऐसे नारों से बचते है )। वे लगातार चंद्रशेखर पर सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप पर आरोप लगाती जा रही है। कुछ दिन पहले इन्होंने आत्महत्या करने की भी धमकी दी थी। यह अपने आरोपों मे कहती है कि चंद्र शेखर कोई नेता नहीं है बल्कि भारतीय जनता पार्टी का एक एजेंट है। अब सोचने वाली बात यह है कि जो चंद्रशेखर जिस पार्टी के विचारधारा से लड़ते - लड़ते सोलह माह जेल तक काट चुका है, जिसे समाज हित में लड़ने के लिए गोलियां तक मारी जा चुकी है वह भला किसी पार्टी का दलाल कैसे हो सकता है? जो व्यक्ति अपने और अपने विचारों के दम पर आज संसद में पहुंचकर आम लोगों की समस्याएं उठा रहा है, जिसे आज भारतीय राजनीति में एक कद्दावर नेता माना जा रहा है, जिसके दहाड़ से बड़ी-बड़ी पार्टियां अपनी रणनीतियां बदलने लगी है उसे भला कोई पार्टी क्या दे सकती है ? और अब रही बात घावरी के आरोप की तो यह बात एक साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है कि जो व्यक्ति आधी रात को किसी महिला पर हमले के लिए पूरे देश से लड़ जाता है, वह इतना घिनौना कार्य कभी नहीं कर सकता ।
दरअसल घावरी भी उसी षडयंत्र का हिस्सा बन चुकी है जो लगातार इस देश में दलित राजनीति को कमजोर करने का प्रयास करता रहा है । भारत का एक तबका जो दलितों को कभी भी अपने सामने कुर्सी पर बैठते हुए देखना पसंद नहीं करता, उसके सामने जब भी कभी ऐसी चुनौती आती है जिससे उसे अपने सत्ता के जाने का डर लगता है वे वैसे ही उस डर को समाप्त करने के लिए गहरी साजिश रचना शुरू कर देते हैं । उत्तर प्रदेश में चार बार मुख्यमंत्री रही चुकी दलित समाज की प्रिय नेता मायावती को भी अनेकों ऐसे मुकदमे झेलने पड़े हैं जिसमें ताज कॉरिडोर, स्मारक और संग्रहालय का निर्माण इत्यादि शामिल है । इन मुकदमों में उन्हें उलझा कर उनकी राजनीति को कमजोर करने का प्रयास किया गया जिसमें कि विपक्षी लोग काफी हद तक सफल भी हुए हैं । सत्ता में बैठे सामन्ती लोग दलित राजनीति को हमेशा छिन्नभिन्न देखना चाहते है ,इसके लिए वे हर तरह का षड्यंत्र रचते रहते है फर्जी मुकदमों का मामला भी इसी का हिस्सा है ।
2023 में वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाडी को भी एक ट्वीट के मामले में ऐसे ही फर्जी तरीके से गिरफ्तार किया गया था । इससे पहले भी 2017 में चंद्रशेखर को NSA अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जा चूका है ,जिसे हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था ।2019 में मध्य प्रदेश के आदिवासी नेता बद्रीनारायण गोड को झूठे खनन के मुक़दमे में गिरफ्तार किया गया था ।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार प्रति वर्ष देश भर में 10-15% झूठे मुक़दमे दर्ज किए जाते है । अब देखना ये है की घावरी का दावा किस हद तक सही साबित होता है ,क्योंकि आज देश भर में चंद्रशेखर की जो राजनीतिक छवि बनी है उसे हर प्रकार से मिटाने का प्रयास किया जा रहा है । घावरी का उन पर आरोप लगाना एक सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक षडयंत्र के अतिरिक्त कुछ और नही दिखाई दे रहा । अब सवाल ये है की आखिर यह सब कर कौन रहा है है ?और इससे सबसे ज्यादा फायदा किसको मिलने वाला हैं?