बीजिंग। चीन ने अंतरिक्ष में धान की खेती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 में चीन के अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिकों ने धान को बीज से पौधा और फिर नए बीज बनने तक का पूरा जीवन-चक्र पूरा कराया। अंतरिक्ष में तैयार हुए इन बीजों को बाद में पृथ्वी पर लाकर उनकी आगे की पीढ़ियों पर शोध किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, अंतरिक्ष के सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण में पौधों के विकास और प्रजनन का तरीका पृथ्वी से अलग हो सकता है। अंतरिक्ष से लौटे धान के बीजों को पृथ्वी पर उगाकर उनकी प्रजनन क्षमता और आनुवंशिक विशेषताओं का अध्ययन किया गया।
अब चीन ने इस प्रयोग को एक कदम आगे बढ़ाते हुए शेनझोउ-23 मिशन के जरिए धान के बीज फिर अंतरिक्ष में भेजे हैं। इस बार वैज्ञानिक अंतरिक्ष स्टेशन पर लगातार दो पीढ़ियों तक धान उगाने का प्रयोग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि लंबे समय तक सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में रहने से धान की आनुवंशिक स्थिरता और पर्यावरण के प्रति अनुकूलन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता.
वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यदि मनुष्य लंबे समय तक चंद्रमा या मंगल जैसे स्थानों पर रहे, तो वहां भोजन का उत्पादन एक बड़ी चुनौती होगी। अंतरिक्ष में फसल उगाने के प्रयोग इसी दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहे हैं। चीन का मौजूदा प्रयोग भविष्य में अंतरिक्ष में बीज से फसल और फिर नई पीढ़ी के बीज तैयार करने वाली कृषि व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है।
यानी यह केवल अंतरिक्ष में धान उगाने का प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में ही भोजन पैदा करने की दिशा में किया जा रहा वैज्ञानिक अनुसंधान है.