जाति आधारित शानदार फ़िल्म"धड़क 2"


   ईधर बॉलीवुड में बहुत कम फिल्में विषय पर देखने को मिलती है. ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड में अच्छे लेखक नहीं है अच्छे फिल्मकार नहीं है अच्छे एक्टर नहीं है... हो सकता है उनके ऊपर बाजार बाद या समाज का कोई दूसरा दबाव काम कर रहा हो. लेकिन कभी-कभी जब कोई #सामाजिक मुद्दों पर फिल्म देखने को मिलती है तो अच्छा लगता है.
   धड़क 2 एक शानदार कहानी से भरी हुई फिल्म है. एक ऐसी फिल्म जो वर्तमान भारतीय समाज में बढ़ती जातीय घटनाओं पर अपना ध्यान आकर्षित करती है.
   कहानी में जय भीम के नारे खूब है... अब जय भीम फिल्मों में खुलकर देखने को मिल रही है. लेखक मजबूर हो चुके हैं इसके आधार पर स्क्रिप्ट लिखने के लिए. फिल्म में नायक बिल्कुल साधारण परिवार से दिखाया गया है बिल्कुल ऐसे जैसे एक #दलित का जीवन #संघर्ष शुरू होता है. आज जो कॉलेज और विश्वविद्यालय में हजारों हजार दलित छात्रा पढ़ रहे हैं मैं दावे के साथ कहता हूं उनमें 90% ऐसे हैं जो शिक्षा के साथ कहीं ना कहीं अपनी पारिवारिक पेशे से जुड़कर चार पैसे कमाने के साथ-साथ अपनी शिक्षा तथा समाज के लिए अपनी लड़ाई जारी रखते हैं.

    #फिल्म में जाति, शिक्षा, दलित और उनके पेशे तथा उनकी स्थिति की बहस कों लव स्टोरी के जरिए बहुत अच्छे से प्रस्तुत किया गया है.

 एक बार इस फिल्म को आप सभी जरूर देखें.
 मैं इस फिल्म को 10 में से 8अंक दूंगा.

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