राष्ट्रहित में छुट्टियों की कटौती है जरूरी

 

   हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी ने इस बार प्रदेश में ईद की छुट्टी को रद्द कर दिया है. इस छुट्टी को रद्द करने के पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि मार्च का महीना वार्षिक कैलेंडर के अनुसार बहुत से कामो का निपटारा करना होता है चूंकि इस बार की ईद 31 मार्च को है और 31 मार्च से पहले रविवार को छुट्टी है इसलिए आवश्यक नहीं की 31 मार्च को भी छुट्टी दी जाए इससे कई सरकारी कामकाज अवरुद्ध हो सकते हैं इसलिए यह छुट्टी रद्द की जाती है.
   सोशल मीडिया पर इस पर घमासान मचा हुआ है और इसे धार्मिक चश्मे से भी देखा जा रहा है. मैं इसके धार्मिक पहलुओं पर ध्यान देने नहीं चाहता, इस पर ध्यान देने के लिए हमारे 244 सांसद काफी है. मैं इसी बहाने सरकार से उन छुट्टियों को भी रद्द करने की गुजारिश करता हूं जिसकी वजह से इस देश के विकास में बहुत सारी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं. उत्तर प्रदेश में अभी 45 दिन का महान उत्सव महाकुंभ का समापन हुआ है और इस महाकुंभ कों महान बनाने के लिए सरकार ने वह सब कुछ किया जो उसे करना चाहिए पर यह सब करने से पहले उसके मन में क्या यह सवाल नहीं था कि इससे कितने सार्वजनिक कार्य मैं रुकावट आएगी? इस 45 दिन क्या प्रयागराज के सभी स्कूल कॉलेज नियमित रूप से संचालित किए गए थे? चूंकि प्रयागराज में हाई कोर्ट और निचली अदालत भी है इसलिए कोर्ट में न जाने कितने केस पेंडिंग हुए होंगे, अस्पताल जाने वालों को रोज ने कितनी परेशानी उठाना पड़ा होगा, प्रयागराज (इलाहाबाद) में होने वाली कितनी परीक्षाएं रद्द की गई क्या इनसे सामाजिक विकास अवरुद्ध नहीं हुआ है?
    पर एक दिन की ईद की छुट्टी से यदि हरियाणा सरकार का विकास रथ रुक सकता है तो निश्चय ही उसे यह रथ नहीं रुकने देना चाहिए. लेकिन मैं चाहता हूं कि सरकार राष्ट्रहित में उन सभी गैर जरूरी छुट्टियों को भी तत्काल रोकने का कार्य करें जिनकी वजह से देश विकास में बहुत सारी बधाएं उत्पन्न हो रही है . हम जानते हैं आज देश में लगभग पांच करोड़ मुकदमे पेंडिंग है. इनमें लगभग तीस हजार हत्या और दो लाख बलात्कार के मुक़दमे है(NJDG के अनुसार ). इन 5 करोड़ में लगभग 15% जघन्य अपराध के मामले हैं. एक बार सोच कर देखिए इन 5 करोड़ आंकड़ों के बारे में. यह पांच करोड लोग आखिर कौन होंगे जिनके साथ इस तरह की घटनाएं हुई होगी ? और यह 5 करोड लोग कौन होंगे जिन्होंने इन घटनाओं कों अंजाम दिया होगा? हम जानते हैं सुप्रीम कोर्ट सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम करता है और वर्ष में लगभग दो सौ दिन, यानी 150 दिन से ज्यादा वह कार्य नहीं करता. अगर इनमें 70 दिन की कटौती की जाए तो 20% हमारा कोर्ट ज्यादा कार्य कर पाएगा यानी आने वाले 20 से 25 सालों में यह पेंडिंग का सारा मामला ही सुलझ जाएगा. जरा सोच कर देखिए जिस दिन इन 5 करोड़ मुक़दमों का निपटारा हो जाएगा तो हमारा देश कितना स्वच्छ सुंदर और विकसित होगा. लोग अन्याय करने से डरेंगे जुर्म करने से डरेंगे और जुर्म करने वाले नेता कभी हमारा भाग्य लिखने के लिए संसद में नहीं पहुंच पाएंगे. पर जिस संसद में आज 46% दागी नेता हो उनसे इस तरह की उम्मीद की जा सकती है? हमारे देश के स्कूल कॉलेज भी लगभग 200 दिन ही खुलते हैं अगर इनमें भी छुट्टियों की कटौती की जाए तो हो सकता है विश्व में हमारे स्कूलों कॉलेजों का भी कुछ नाम हो जाए, तो क्या हम इन कटौतियों के लिए तैयार हैं?
     हम बार-बार अपने देश को हिंदू धर्म घोषित करने की बात करते है और हमारे धर्म में सबसे ज्यादा छुट्टियां भी शामिल है. नवरात्र पर 9 दिन काम होना मुश्किल होता है? सावन के महीने में पूर्वांचल में एक महीने तक एक तरफ की सड़क बंद कर दी जाती है जिससे अनेकों दुर्घटनाएं होती है. ट्रांसपोर्ट में देरी की वजह से वस्तुएँ महंगी हो हो जाती है.दिवाली,होली, दशहरा पर हफ्तों ऑफिस में कार्य नहीं होता. तो क्या हम इन सब त्योहारों पर छुट्टी की कटौती के लिए तैयार है? अगर हमारे नेता वास्तव में देश को विकसित देखना चाहते हैं और उन्हें चिंता है राष्ट्र विकास की तो उन्हें इन छुट्टियों पर भी ध्यान देने की जरूरत है.

लेखक 

डॉ संजीव कुमार
राजनीतिक विशेषज्ञ 

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