बुधवार को एक बार फिर सरकारी नौकरी का एक बड़ा परीक्षा होते होते टल गया. इस बार रद्द होने वाले परीक्षा में लोको पायलट की बारी थी. गौरतलब है कि यह परीक्षा लगभग दो साल से अब तक उलझी हुई थी, इस परीक्षा का प्रथम सत्र यानी प्री परीक्षा होने के पश्चात उन्नीस मार्च को मुख्य परीक्षा होनी थी, पर अंत में आखिरी दिन यह परीक्षा टाल दी गई और फिर से लाखों बेरोजगार नवयुवक अपना बस्ता समेट कर अपने घर लौट आए है.अब ये घर बैठकर प्रतीक्षा करेंगे कि सरकार इस परीक्षा को पुनःकराने का कब आदेश पारित करेगी और वे फिर से परीक्षा की तैयारी में जुटकर अपने सपने कों जिन्दा रखने का प्रयास करेंगे.
शीतकालीन लोकसभा सत्र में विपक्ष का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री जी ने जवाब दिया था कि पिछले 10 सालों में तकरीबन 70 से ज्यादा परीक्षाएं या तो रद्द हुई है या फिर पर्चा लिक हुआ है. इस 70 में एसएससी, पीसीएस,नीट,जे ई ई,यूपी पुलिस,बिहार पुलिस जैसी बड़ी-बड़ी भर्तियां शामिल है. आज जिस प्रकार से शिक्षित नवयुवकों का भविष्य सरकार की गलत नीतियों और योजनाओं की वजह से अधर मैं लटका हुआ है युवाओं के भविष्य से लगातार सरकार खेल-खेल रही है ऐसे में अब आवश्यक है कि बेरोजगार नवयुवकों के लिए सरकार उनकी बेरोजगारी की सुरक्षा का अधिनियम पारित कर उन्हें सुरक्षा प्रदान करें.
हम जानते है कि आज देश में एक छोटी भर्ती से लेकर बड़ी भर्ती तक पर बेरोजगार युवकों की नजर टिकी हुई रहती है. हम अच्छी तरह जानते हैं कि सरकार एक तो बहुत विवश होने के बाद ही कुछ वैकेंसी लेकर आती है. जब सरकार को लगता है कि अब बिल्कुल ही काम नहीं हो पाएगा तब वह वैकेंसी निकलती है. फिर इस वैकेंसी को भरने के लिए बेरोजगार युवकों को अपनी श्रेणी के अनुसार उसका शुल्क भी अदा करना पड़ता है. और इधर आप देखेंगे तो लगातार सरकारी योजनाओं द्वारा निकलने वाली भर्तियों के शुल्क बढ़ते जा रहे है इन आवेदनो कि फीस पांच सौ से कम देखने को नहीं मिलेंगे. जब एक युवक इस आवेदन को भरता है तो उसके साथ आरम्भ होती है उसकी वह युद्ध जो न जाने कितने आवेदन करने के बाद भी पूर्ण नहीं हो पाता . वह आवेदन करने के बाद संबंधित प्रतियोगी परीक्षा की पुस्तक खरीदता है यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करता है फिर गांव से दूर शहर में जाकर किराए पर मकान लेता है और परीक्षा की तैयारी में जीजान से जुट जाता है. फॉर्म निकलते समय उसे यह बताया जाता है कि यह भर्ती यथा शीघ्र साल भर के अंदर पूरी हो जाएगी और फिर इसी हिसाब से यह नवयुवक अपनी तैयारी करना शुरू करते हैं. इनमे बहुत से नवयुवक वें भी होते हैं जो डिग्रियां हासिल करने के बाद कहीं छोटी मोटी नौकरी करके अपना जीवन यापन कर रहे होते हैं, कुछ अपना छोटा-मोटा व्यवसाय खड़ा कर रहे होते हैं, कुछ परिवार के सहयोग के लिए बड़े शहरों में जाकर के छोटा-मोटा काम करते हैं. पर जैसे ही उनके मन मुताबिक सरकार वैकेंसी निकालती है वें सब कुछ छोड़ करके तैयारी करने के लिए जुट जाते हैं.
कभी-कभी कुछ वैकेंसी की परीक्षाएं तो चार-चार पांच-पांच साल तक घसीट जाती है ऐसे में उनके मित्र,पड़ोसी,रिश्तेदार लगातार उनके रोजगार के विषय में पूछते रहते हैं जिसका वें जवाब दे दे कर थक चुके होते हैं.लड़के अपने परिवार से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए घर से पैसे मांग मांग करके थक चुके होते हैं पर लालच बस की अब चार महीने में उनका जीवन सेटल हो जाएगा वें घर से पैसे मांगते रहते हैं. परिवार के लोग भी पैसे दे दे कर परेशान हो चुके होते हैं परंतु नहीं करने की उनमे में भी हिम्मत नहीं होती और वह अपनी जमीन बेचकर अपने जेवर बेचकर अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए पैसे देते रहते हैं, और ऐसे में जब इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवकों को लगातार परीक्षा रद्द होने तिथि बदलने की सूचना मिलती है तो यह निराश होने लगते हैं और अवसाद में चले जाते हैं चिड़चिड़े हो जाते हैं कुछ तो आत्महत्या तक कर लेते हैं. पर सरकार को इससे कुछ फर्क पड़ने वाला नहीं होता है और जब ऐसे में यह युवक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं तो उनके ऊपर आंसू गोले छोड़ जाते हैं उनके ऊपर लाठी चार्ज की जाती है. आखिरी इन युवाओं का कसूर क्या होता है? क्या अच्छी शिक्षा हासिल करने के बाद अच्छी प्रतियोगिता तैयारी करने के बाद इनका अधिकार नहीं है कि सरकार ठीक-ठाक इन्हें जीवन गुजारने के लिए नौकरी दे सके.
इसलिए इन करोड़ों युवाओं के भविष्य कों सुरक्षित रखने के लिए, शिक्षा प्राप्त करने के बाद इन बेरोजगार युवकों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए तथा परीक्षा देने के लिए सरकार को ब्यापक प्रबंध करना चाहिए. सबसे पहले तो कोशिश यह होनी चाहिए कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सभी शुल्क हटा देनी चाहिए और यदि समय पर परीक्षा ना हो पाए तो ऐसी स्थिति में इनके पुनः परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था निशुल्क सरकार के द्वारा व्यवस्थित होनी चाहिए. एक उम्र और सीमा के बाद इन्हें बेरोजगारी भत्ता भी प्रदान करना चाहिए. तभी हम अपने युवाओं के हौसलों को बचा पाएंगे और उन्हें अवसाद, आत्महत्या, निराशा के अंधकारमय जीवन से बाहर निकाल पाएंगे.