विगत चार लोकसभा चुनावों के पश्चात यह पहला चुनाव है जिसके परिणाम ने सभी को चौंका का कर रख दिया है।इस चुनाव ने भारतीय राजनीति को नया जीवन दिया है।यह चुनाव कई मुद्दों पर हुआ था ,जिसमे प्रमुख मुद्दे थे-
1.गरीब बनाम अमीर
2.संविधान बनाम अत्याचार
3.बेरोजगारी बनाम अंधभक्ति
4.धर्म बनाम नैतिकता
एक तरफ थी सारी शक्तियां ed,cbi, 10 साल के सत्ता का पैसा, पूरी मीडिया,और दूसरी तरफ हारे हुए विवश लोग जिनको हर तरह से चुनाव के पहले से ही तोड़ा जा रहा था । मत भूलिए यह चुनाव अहंकार में डूबे नेताओं और अपनी जमीन तलाश रहे नेताओं के बीच थी और दांव पर था युवाओं का भविष्य,मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक समझना और भारत को धर्मांधता के दल दल में चीर काल के लिए धकेलने की साजिश।
मैने कई राज्यों में इस दौरान भ्रमण किया सबका यही मानना था की मोदी तय है।परिणाम आपके सामने है और हम जानते है इस जनाधार ने मोदी को दंतविहीन कर दिया है ।पांच साल तो छोड़िए 5 महीना भी मोदी को यह सरकार खींचना मुश्किल हो जायेगा।400 पार के नारे के साथ उतरी मोदी सेना जिस सेना के कंधे पर राम मंदिर निर्माण का गौरव था,370 का अहंकार,मुस्लिमों के बगैर हिंदू राष्ट्र की संकल्पना और कमजोर और लाचार (जिसे मोदी जी ने करने की पूरी कोशिश की )विपक्ष विहीन चुनाव लड़ने का अवसर ।वह शक्तिशाली सेना 250 का भी आकड़ा न छू सकी?यह तब है जब बीएसपी ने मोदी पर सीधा हमला नहीं किया और गठबंधन से दूर रही वरना 200 भी पहुंचना इनके लिए दुभर हो जाता।
आखिरी बात यह भी बताता चलूं की इस चुनाव में करोड़ों वह गरीब जनता भी शामिल नहीं हो सकी जो इनकी नीतियों से बेघर परदेशी हो चुके है रोजी रोटी के लिए दर दर भटक रहे है ।अब आप समझ सकते है मोदी कितने शक्तिशाली है ,अगर नैतिकता का हवाला दिया जाए तो मोदी जी को आज पीएम पद का शपथ नही लेना चाहिए पर हम जानते है यह सरकार कितनी नैतिक है।खैर सभी मजदूर,शिक्षित युवा,राहत की सांस ले सकते है क्योंकि यह सरकार अब इन पर हमला करने से डर चुकी है ।
आपका डॉ संजीव कुमार 🙏