भारतीय शिक्षा उद्धारक महान ज्योतिबा फूले जी के 196 वें जन्म दिवस की शुभ कामनाएं


वंचित समाज के नायक के रूप में ही भारत और विश्व उन्हें जानता है ।हमने अपने देश के महान संतो ,समाज सुधारकों को जातियों एवं धर्म की बेड़ियों तक ही सीमित रखकर उनके ज्ञान और उनकी सामाजिक उपलब्धियां को खंड-खंड में विभक्त करके खुद को भी बांट लिया है.
   इन महा पुरुषों ने समाज को एक ऐसी दिशा दी जिससे समाज के एक वर्ग का ही नहीं परंतु समूचे देश एवं विश्व का विकास उसके साथ जुड़ गया. क्या होता अगर देश में दुनिया में स्त्रियों की शिक्षा रोक दी गई होती क्या होता यदि विश्व की 80% आबादी की शिक्षा रोक दी जाती है. ज्योतिबा फुले जी ने यह कार्य किया देश की वंचित जनता के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलें आधी आबादी के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलें उन्हें मूल जनधारा में लाने के लिए पूरा जीवन लगा दिया समाज को जागरूक करने के लिए अपने निजी सुख को त्याग दिया. और हमने क्या किया उन्हें एक तबके से ही जोड़कर देखा एक प्रांत तक ही उन्हें सीमित रखा. कितनी संकुचित दुनिया में जी रहे है हम. बहुत कम लोग जानते होंगे कि ज्योतिबा फुले जी महज सातवीं क्लास तक ही पढे थे परंतु उन्होंने इतनी न्यूनतम शिक्षा के बाद भी देश में शिक्षा की वह अलग जगाई जो बड़े-बड़े शिक्षक विद्वान भी नहीं कर सके. उन्होंने सामाजिक जागरूकता के लिए दीनबंधु समाचार पत्र भी निकाला यह एक तरह से वंचित जगत के लिए भारत का पहला समाचार पत्र था जो उनकी आवाज को देश और दुनिया तक पहुंचाने का कार्य कर रहा था, इसके साथ उन्होंने अनेक पुस्तक लिखे जिनमें गुलामगिरी विश्व विख्यात है. सामाजिक विकास की उनकी समझ को आज के बड़े-बड़े राजनेता सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा उनके नाखून के बराबर भी नहीं टिक सकते क्योंकि उन्होंने अपनी अशिक्षित पत्नी को भी पहले शिक्षित किया और उन्हें भी स्त्रियों की शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया.

डॉ.संजीव कुमार 

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