विगत 1 जनवरी 2019 को जब नीति आयोग
से रोजगार के आकड़े मांगे गये तब उसने कोई आकडा देने से साफ मना कर दिया जाहिर है सरकार हताश थी |उसके बाद NSSOने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसके मुताबिक पिछले
४५ वर्षों में बेरोजगारी की समस्या इतनी विकराल नही थी |यह सब तब है जब वर्तमान
सरकार के एजंडे में बेरोजगारी मिटाना प्रमुख मुद्दा था |
जुलाई में बीबीसी ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था जिसमे बताया गया है कि
ऑटो इंडस्ट्री में ३१%की गिरावट हो चुकी है ,वही एक शोध में रायटर्स ने कहा है की मारुती
कंपनी ६%कर्मचारियों को अब तक निष्काषित कर चूका है |डर्स एंड माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज
(एमएसएमई) ने साल 2014 से
देश में लगातार नौकरियों में कमी और मुनाफे में गिरावट की बात कही है. नोटबंदी और जीएसटी लागू करने को इसकी मुख्य
वजहों में से बताया गया है. ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स आर्गेनाइजेशन (एआईएमओ) ने
अपने नए सर्वे रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है|
एआईएमओ ने देश भर में 34,700 व्यापारियों और एमएसएमई का सैंपल सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट दी है. जिसके मुताबिक साल 2014 के बाद विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारी और उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं. एआईएमओ 3 लाख से अधिक सूक्ष्म, छोटे और मध्यम और बड़े पैमाने पर उद्योगों का प्रतिनिधित्व करता है|रिपोर्ट में ट्रेडर सेगमेंट (व्यापार श्रेणी) में 43 प्रतिशत जबकि माइक्रो सेगमेंट (सूक्ष्म श्रेणी) में 32 प्रतिशत नौकरी की कमी की बात कही गई है. इसके अलावा स्मॉल सेगमेंट (लघु श्रेणी) में यह कमी 35 प्रतिशत है और मीडियम स्केल उद्योगों में 24 प्रतिशत नौकरियों की कमी है| यह बात आज हर युवा जनता है कि वर्त्तमान सरकार कूटनीति ,राजनीती ,विदेशनीति पर तो कामयाब है लेकिन अर्थनीति एंव रोजगार को पटरी पर लाने में असफल रही है |
एआईएमओ ने देश भर में 34,700 व्यापारियों और एमएसएमई का सैंपल सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट दी है. जिसके मुताबिक साल 2014 के बाद विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारी और उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं. एआईएमओ 3 लाख से अधिक सूक्ष्म, छोटे और मध्यम और बड़े पैमाने पर उद्योगों का प्रतिनिधित्व करता है|रिपोर्ट में ट्रेडर सेगमेंट (व्यापार श्रेणी) में 43 प्रतिशत जबकि माइक्रो सेगमेंट (सूक्ष्म श्रेणी) में 32 प्रतिशत नौकरी की कमी की बात कही गई है. इसके अलावा स्मॉल सेगमेंट (लघु श्रेणी) में यह कमी 35 प्रतिशत है और मीडियम स्केल उद्योगों में 24 प्रतिशत नौकरियों की कमी है| यह बात आज हर युवा जनता है कि वर्त्तमान सरकार कूटनीति ,राजनीती ,विदेशनीति पर तो कामयाब है लेकिन अर्थनीति एंव रोजगार को पटरी पर लाने में असफल रही है |
बेरोजगारी के कारण –
२०१४ के चुनाव में गुजरात के उद्योग को
विकास का माडल तथा रोजगारपरक शहर के
उदहारण की चर्चा देश भर में
प्रसारित की गई थी |मुझे दुःख है की यदि यही बेरोजगारी मिटाने का हमारा
प्रमुख माडल है तो निश्चय ही हमारे नीति निर्देशक देश की गरीब जनता तथा बेरोजगार
नवयुवको का मजाक बना रहे है |
गौरतलब है कि आज देश के90
%उद्योगों में 10 से 12 घंटे लोग मजदूरी
करने पर विवश है |8 घंटे की ड्यूटी एक छलावा है |सोचने वाली बात है की जो व्यक्ति
12 -14 घंटे काम करेगा वह अपने बच्चो ,माँ
बाप को क्या समय देगा ?वह भी ऐसी तनख्वाह की बस जिन्दा रह सके |
हमारी सरकार की नीतिया भी युवावों के साथ सिर्फ छल ही कर रही है जिससे देश
में अपराध,बेरोजगारी ,असमानता का ही विकास हुआ है |मसलन आर्मी तथा पुलिस (प्रशासन
)विभाग में 24 घंटे की नौकरी |इस 24 घंटे
की नौकरी से जहां दो रोजगार छीने जा रहे है वही पुलिस में भर्ती युवा लगातार 24
घंटे की ड्यूटी करके कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाता है ,नतीजन वह ईमानदारी
और जोश से अपना काम नही कर पाता जिसके
परिणाम स्वरुप समाज में अपराध अनियंत्रित है |
देश में आज असमानता अपने चरम पर है
|अमीर और अमीर हो रहे है ,तथा गरीब अपने
बच्चो को गरीबी में गरीबी से जीना सिखा रहे है |इसके दो कारण है |पहला शिक्षा का
महंगा होना तथा सरकारी नौकरी में बेहिसाब पैसा और पैसे का मोह |एक स्कूल अध्यापक
पांच घंटे की ड्यूटी में पचास हजार रुपये कमाता है और दूसरी तरफ दूसरा पढ़ा लिखा
बेरोजगार दस घंटे मेहनत करने पर दस हजार भी नही कमा रहा है |यहाँ से जन्म होता है बेरोजगारी तथा
असमानता का |दूसरी तरफ निजी उद्योगों में लोग 12 -14 घंटे मेहनत करके भी अपना
परिवार नही चला पा रहे है क्योकि इन उद्योगों ने कभी भी सरकार की न्यूनतम सैलरी तथा न्यूनतम अवधि
का पालन नही किया ,जिसपर सरकार को सख्त होने की आवश्यकता है |
सुझाव –
भारत एक विशाल भूखंड है-जिसका अर्थ है जहाँ
सबका पेट भरता हो इसलिए इसके नाम में ही
हमारे लिए आशीर्वाद छुपा है |भौगोलोक
दृष्टि से भले ही हमारे पास जनसँख्या के हिसाब से काफी कम भूमि है ,परन्तु दूसरी
सच्चाई यह है कि प्रकृति ने सबसे ज्यादा उपजाऊ भूमि हमें ही दिया है |इसलिए समय आ
चूका है की हम कृषि को भी एक उद्योग के रूप में विकसित करे |हमारे देश के अधिकतम
किसान या तो अशिक्षित है या फिर कृषि के लिए विज्ञान की मदद नही लेते जिसकी वजह से
हमें असुन्तलित खाद्य व्यवस्था से जूझना पड़ता है ,परिणामस्वरूप बहुत सी वस्तुओं का
हमारी सरकार निर्यात करती है | अगर हम
खेतों में अपनी आवश्यकतानुसार फसल उगाएँ तथा सरकार इसे भी रोजगार में जोड़ दे
अर्थात तनख्वाह दे और शिक्षित युवाओ की
भर्ती करे तो हम रोजगार तथा भोजन दोनों
समस्या से लड़ सकते है |इसके लिई खेतों को
या तो सरकार पट्टे पर ले अथवा निजी उद्योग
को सौप दे |
इसके अतिरिक्त कुछ निम्न उपाय है जिससे हम बेरोजगारी तथा असमानता से लड़
सकते है –
1.
अधिकतम आठ घंटे की
ड्यूटी का नियम सरकारी तथा निजी सभी
संस्थानों में सख्ती से लागु किया जाय ,चाहे वह कोई भी विभाग हो |
2.
चौबीस घंटे खुले रहने
वाले संस्थान या उद्योग को सिफ्ट के
अनुसार भर्ती करने का आदेश हो ,ओवर ड्यूटी व्यवस्था ख़त्म की जाय |
3.
सभी वर्ग की नौकरी में
पांच वर्ष की कटौती की जाय -केवल विभागाध्यक्ष ,अध्यक्ष ,मुख्य ,को ही साठ साल
पूरा करने का प्रबंध हो |
4.
निजी उद्योग में सरकारी
तर्ज पर आरक्षण लागु हो |
5.
निजी उद्योगों में भी
सरकार की तरह वर्ग व्यवस्था लागु हो और उसी अनुसार वेतन दिया जाय|
6.
ए .बी .सी .ग्रेड के
कर्मचारियों की पेंसन व्यवस्था रद्द हो केवल सैन्यकर्मी तथा वैज्ञानिको की ही
पेंसन लागू रहे |डी श्रेणी के कर्मचारियों को पेंसन मिलना चाहिए |
7.
वेतन सरकार के प्रति
व्यक्ति न्यूनतम आय के तर्ज पर पांच गुणा कर के दिया जाय –जैसे ---देश का औसत आय
प्रति व्यक्ति तीन हजार रुपये है तो डी ग्रेड के कर्मचारी की तनख्वाह पंद्रह हजार
होनी चाहिए और फिर 35 %जोड़ कर सी .बी .एंव ए को दिया जाय|किसी भी सुरत में 35%से ज्यादा
का अंतर न हो |
8.
शक्तिशाली एंव न्यायिक
सेवा कर्मचारियों का सुरक्षा तथा सेवा
खर्च अलग हो |
9.
दो लाख तक का ऋण बिना
ब्याज के 25 -40वर्ष तक के युवावों को
किसी जमानत के वगैर व्यवसाय करने के लिए दिया जाय तथा छः माह बाद सख्ती से वसूली
हो |
10.
स्नातक होने क बाद सरकार युवाओ
को या तो उनके बेरोजगार रहने तक भत्ता दे या फिर रोजगार हेतु सभी आवेदन मुफ्त किया
जाय और वाहन खर्च मिले परीक्षा देने हेतु
|
--संजीव
कुमार (शास्त्र ) –
शोध
छात्र ,महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ
(
वाराणसी)
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berojgari ka hal