देशभक्ति और देशद्रोही की परिभाषा


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एक दिन तिरंगे को सलामी दे दी और आप देशभक्त हो गए?गांधी जयंती पर उनकी प्रतिमा साफ कर के दो फूल चढ़ा दिए आप देशभक्त हो गए?या फिर आपने सरकार से अपने अधिकार पूछ लिया तो आप देशद्रोही हो गए?या फिर अपने अपमान पर अधिकारियों के आगे तन गए तो आप देशद्रोही हो गए?शायद आज हम ऐसी ही परिभाषा पर जी रहे है।
यह दुनिया की पहली सरकार है जो विद्वानों कीआवाज़ को सुनना नही चाहती ।क्या कारण है कि देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के युवक आज देशद्रोहियों की तरह पिटे जा रहे है?सरकार बलात्कार हत्या ,बेरोजगारी, असामनता,रोक नही पा रही है तो सबसे नागरिक होने का प्रमाण मांग रही देश भक्त होने का प्रमाण मांग रही हैं भले ही वह एक महिला मुख्यमंत्री का काफ़िला ही क्यों न रोक दे और उनसे बत्तमीजी करे।
रवींद्रनाथ टैगोर जी ने कहा है जब आप बेरोजगारी, अव्यवस्था पर खरे नही उतर सकते तो देश मे देशभक्ति का शिगूफ़ा छेड़ दीजिये आप की राजनीति बनी रहेगी।
इस सरकार ने कई महत्वपूर्ण और योजनाओं को लागू जिसकी कीमत गरीब,व्यापारी जनता ने जान और व्यापार खोकर चुकाया पर सब निरर्थक साबित हुआ।पर फिर भी विरोध करनेवाले देशद्रोही है और सरकार समर्थक देशभक्त
देशभक्ति की परिभाषा गढ़ने वाले शायद यह भूल रहे है कि यदि अभिनंदन पाकिस्तान में नही गिरे होते तो इनका मतीयमलेट हो चुका होता जैसा कि अभी राज्य चुनाव में दिख रहा है।मोदी जी ने संगम के सफाईकर्मियों के पैर धोकर पिये पर अपने भक्तों को यह नही सिखा सके की उनके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए,।होना तो ये चाहिए कि कम से कम उन्हें अत्याधुनिक सफाई के किट तो उपलब्ध करवा देते ,पर अब क्या फायदा पांच साल बाद वो ऐसा ड्रामा फिर कर लेंगे.. इसे कहते है देशभक्ति।
यह सरकार गाय को माता कहती है उसका परिणाम आज ये है कि आज गाय को कोई पूछ नही रहा है, सरकार इन्हें बाड़े में बांध रही है जहां बिन सेवा के वे भूखे प्यासे तिल तिल मर रही है..उधर भैस के दाम दोगुने हो चुके है और अब वह घर घर मे मजे से है।
क्या इसी लिए 60 महीने मांगे थे मोदी जी ने हमसे ?क्या यही है देशभक्ति की परिभाषा?
एक आदमी जो एक सफाईकर्मी से ,मजदूर से अबे तबे कर के बात करता है और रंगीन कपड़े पहनकर जबरदस्त भाषण देता है क्या वह देशभक्त है?जहाँ एक समाज की बहन बेटियाँ सड़क पर नहाने को विवश है और हमे शर्म नही आती उनके साथ छेड़खानी करने में और हम देशभक्त है ? कुछ लोग रेलवे की टिकट लेना हो चाहे ,गैस लेना हो ,रासन लेना हो लाइन में खड़ा होना अपने शान के खिलाफ समझते हैं और अगले वाले को धक्का देकर हेकड़ी दिखाकर आगे हो जाते है क्या ऐसे लोग देशभक्त है?आज भी एक समाज के लोग ऐसे है जब उनसे उनके दोगुना उम्र का आदमी प्रणाम करता है तो उन्हें आशीष देने में गर्व होता है क्या ऐसे लोग देशभक्त है ?जहां लोगोँ को अपनी जाति पर गर्व है?गुंडागर्दी पर गर्व है? रंग पर गर्व हैं, रियासत पर गर्व है ,एक दूसरे को उसकी जाती और धर्म पर नीचा दिखाने की कोशिश करते है ऐसे लोग देशभक्ति की परिभाषा गढ़ रहे है भले ही आज भी हैम छोटी छोटी चीजो के लिए छोटे छोटे देशो पर निर्भर है...पर हमें गर्व है?
जो मौसम से लड़कर भोजन दे रहा है वह भला यह सब क्या समझे ,जो गरीबी की जंजीरे तोड़कर तकदीर बदलने निकला हैं ,उसे हम दकियानूसी सीखने में लगे हुए है, जो बच्चियां रूढ़िवादिता को तोड़कर आगे बढ़ रही है वे अपनी आबरु बचाये या परिभाषा समझे ,?
पर सरकार हमे उलझाये हुए हैं और हमे उलझते जा रहे है।इनसे बाहर निकलिए ।जो सरकार असमानता
,अशिक्षा, बेरोजगारी ,बलात्कार पर विफल है वह सिर्फ नई और बे बुनियाद योजनाएँ लाकर हमे बेवकूफ बना सकती है देशद्रोही या देशभक्त नही ।...

डॉ संजीव कुमार 

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