डूबती लोकतंत्र में उम्मीद की एक मात्र किरण है राहुल गांधी


    पूरा देश धार्मिक लोक तंत्र में इस वक्त डूबा हुआ है। वामपंथियों की भाषा में अगर लिखा जाए तो लोग धार्मिक अफीम के नशे में है। पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र विविधता के लिए जाना जाता है इसकी बुनियाद इसी विविधता की ईंटो से रखी गई है। पर जिस देश का प्रधानमंत्री हर वक्त सिर्फ एक धर्म का चोला पहनकर देश के विकास की बात कर रहा है लोगों को हर घड़ी एक नया स्वप्न दे रहा है। लोग कर्ज में डूबे हुए हैं पर फिर भी उन्हें इसका  एहसास नहीं है दर्द नहीं है तो ऐसे युग में उन विजेता  नेताओं को सलाम जो लगातार विजयी हो रहा है, और उन नागरिकों को भी सलाम जो अपने बच्चों के स्कूल का फीस नहीं दे सकते पर लगातार त्यौहार मनाने के लिए कर्ज भरी जिंदगी जी रहे हैं और खुश है।
   आज देश में ना ही कोई विपक्ष है ना ही कोई मीडिया जो सरकार से सवाल करें और उससे पूछ सके की क्या हम एक लोकतंत्र देश में है?क्या यह एक धर्मनिरपेक्ष देश में है?क्या प्रधानमंत्री जैसा व्यक्ति 11 दिनों तक सिर्फ एक धार्मिक आयोजन के लिए व्रत रख सकता है, इतना वक्त है उसके पास? पर दूर तलक कोई यह सवाल करने वाला नहीं है। इन ना उम्मीद की किरण में मात्र एक व्यक्ति दिन-रात कप कपाती ठंड में बरसते गरजते बादलों के बीच हजारों मील पैदल यात्रा कर रहा है अपने देश की लोकतंत्र को बचाने के लिए। विपक्ष में कई ऐसी छोटी-मोटी पार्टिया  और राज्य स्तर की पार्टियां हैं जो सत्ता में वर्चस्व तो चाहती है पर कोई खास परिश्रम करने के स्थिति में नहीं है ,नहीं उनके पास कोई मजबूत इरादा दिख रहा है और ना ही कोई रणनीति। एक ऐसी सत्ता जिसके सामने सारे कलम नतमस्तक हो चुके हो चाहे वह सिनेमा हो मीडिया हो या फिर इतिहासकार । एक ऐसी सरकार जो कई राष्ट्रीय संपत्तियों के बचने के बाद भी विकास का आलाप राग रहा हो,देश कर्ज में डूबा हो फिर भी वह सत्ता में लगातार आगे बढ़ रहा है और विपक्ष ऐसी सत्ता को हटाने में ना कामयाब हो और फिर भी उनकी रणनीतियां सिर्फ कमरे में बंद करके बनाई जा रही हो ऐसी स्थिति में समझी जा सकती है कि राहुल गांधी जैसा व्यक्ति इस लोकतंत्र के लिए कितना कुछ करने के लिए तैयार है।
  आज हम भले ही उनके इस बलिदान को भूल जाए या फिर उन पर उंगली उठाते रहे,पर इतिहास में जब कभी भी लोकतंत्र की कथा को दोहराया जाएगा राहुल गांधी एक मिसाल बनकर खड़े होंगे। उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता से यह दर्शा दिया है कि उनकी पीढ़ियों ने इस देश के लिए सच्चे मायने में बहुत कुछ किया है। हां कुछ ऐसी गलतियां उन्होंने जरूर की जिसकी वजह से आज हमारे सामने यह लोग सत्ता में है जो लोकतंत्र को कभी समझ ही नही सकते । विपक्ष के बहुत से ऐसे राजनेता जो कई दायरे में बंधे हुए हैं, उन्हें अगर सचमुच अपने जनता के हितों  से प्रेम है तो वह अपने हितों को पीछे रखते हुए राहुल गांधी के साथ ईमानदारी और निष्ठा से उठ खड़े हो ।
डॉ.संजीव कुमार 

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