भारत की सबसे ताकतवर मिठाई "रेवड़ी"
……................. ........ .........
आजकल यह मिठाई बड़े जोरों शोरों से खरीदी और बेची जा रही है वैसे तो यह भारत में मकर सक्रांति के समय चाव से खाया जाता है , परंतु इसका भाव सदा भारत के लोकतंत्र में बना हुआ है ।जब भी कोई बात सत्ता के आड़े आती है जैसे सत्ता बनानी हो या बिगाड़नी हो तो इसका गुड़गान आरंभ हो जाता है।
अब आप सोचेंगे कि भारत में तो एक से एक मिठाई हैं तो क्या वे नहीं खरीदे जा सकते है क्या उनका भारत के लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है परंतु जैसे हिंदू धर्म में किसी पूजा पर्व को मनाने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है वैसे ही किसी अच्छे मिठाई को खिलाने से पहले हैं राजनीति में रेवड़ी खिलाने के बाद ही खिलाया जाता है ।
माफी चाहूंगा मैंने यहां रेवाड़ी की तुलना गणेश जी से करने की बिल्कुल कोशिश नहीं की है । मैं पुनः लौटना चाहूंगा रेवड़ी की विशेषता पर मान लीजिए आपको खाने के लिए गुलाब जामुन दे जाते हैं तो आप उन्हें कितने दिन रख कर खा सकते हैं 2 दिन 4 दिन या एक हफ्ता परंतु रेवड़ी आप महीनों खा सकते हैं हां यह अलग बात है यह गुलाब जामुन की तरह मजा नहीं देगा परंतु जब भी आपको मीठा खाने की इच्छा होगी तो आप इससे भी काम चला सकते हैं लंबा टिकाऊ है सस्ता है और मजेदार बात है कि इसमें तिल भी लगे हुए होते हैं और तिल में 13 गुण होते हैं और इसीलिए यह अन्य मिठाइयों से ज्यादा ताकतवर ज्यादा है । और खिलौने वाला आपको समाज की तेरा बुराइयों से बचाने का वचन देता है।
इसीलिए हमारे राजनेता इसके लिए हमेशा लालायित रहते हैं पर हमारी जनता भी कम चालाक नहीं है एक तो वैसे ही हमारे देश में गरीबों की एक लंबी संख्या है तो वह एक हफ्ते तक अपने फ्रिज में जामुन रख पाए या बर्फी यह तो उनके बस की बात नहीं है इसलिए वह इस मिठाई को बहुत ही जल्द लपक लेते हैं। इस मिठाई का सीजन हमारे देश में हमेशा बना रहता है क्योंकि यहां हमेशा चुनाव चलते रहते हैं और चुनाव में हमारे राजनेता जनता के लिए रेवड़ी बांटने का लगातार काम करते रहते हैं इसलिए रेवड़ी भी सफल हो जाता है और राजनेता भी सफल हो जाते है।
मुझे तो लगता है कि अब तो इस रेवड़ी को राष्ट्रीय मिठाई घोषित कर देना चाहिए क्योंकि इसे बांटने वाले भी दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं और खाने वाले भी तो अन्य मिठाइयों का आखिर स्थान तो दूसरे क्रम पर ही जाता है चाहे वह भले ही अच्छे दर्जे के स्वादिष्ट ही क्यों ना हो पर उनका क्या उचित है जब वह सत्ता ही ना बना सके जनता ही न बना सके देश का निर्माण ही न कर सके।
तो आज से रेवाड़ी खाना आरंभ कर दीजिए, और कोई बिगड़ा काम बनाना हो तो घर में भी रखिए।
डॉ.संजीव कुमार