महान दार्शनिक, राजनीतिक एवं समाज विशेषज्ञ अरस्तु ने कभी कहा था कि लोकतंत्र अज्ञानियों (मूर्खो) द्वारा किया गया शासन है. वे लोकतंत्र को भीड़ का शासन कहते थे, और भीड़ का कोई विवेक नहीं होता. मध्य भारत में इस वक्त लू की लपेट चल रही है, इधर पांच राज्यों के चुनाव ने इसे और गर्म कर दिया था. अब पांच राज्यों के चुनाव का परिणाम भी आ चुका है. देश के सभी राजनीतिज्ञो , मीडिया, और आम जनों का ध्यान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के परिणाम पर था. पश्चिम बंगाल जहां पिछले 15 साल से कद्दावर नेता ममता बनर्जी शासन में थी. इसलिए बीजेपी यहां जीतने के लिए एक दशक से लालायित थी. होती भी क्यों नहीं अब तक उसने जिन राज्यों में जैसा चाहा वैसा परिणाम हासिल किया है. अगर इस बार का चुनाव बीजेपी वहां हार जाती तो 29 के बाद शायद ही कभी उसे पश्चिम बंगाल में जीत का मुंह देखना पड़ता है. एक प्रकार से कहें तो यह जीत उसके नाक पर बन आयी थी. क्योंकि अगर वह अपने युग पुरुष के रहते ऐसा नहीं कर पाती तो उसकी रणनीति उसे कभी चैन से सोने नहीं देती.
ममता बनर्जी को हटाने के लिए भारतीय जनता पार्टी 2021 से ही कमर कस चुकी थी. आज शायद बहुत कम लोगों को यह याद हो कि बीजेपी की आज जो टीम पश्चिम बंगाल में बनी हुई है वह उसके उसी ईडी, सीबीआई के धर पकड़ परिणामों का ही नतीजा है कि टीएमसी के आधे नेता बीजेपी में शामिल हो चुके थे, फिर भी ममता सबके सामने अकेले डटी रही. ममता को हराने के लिए बीजेपी ने इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी. इडी, सीबीआई तो पहले से ही उसके पास थी इस बार उसने सर की बदौलत तथाकथित घुसपैठियों को बाहर निकाल कर अपनी जीत पक्की कर ली. उसे यह घुसपैठिए ममता बनर्जी की उन्हीं क्षेत्रों में मिले जहां टीएमसी को 70 से 80 प्रतिशत सीटे प्राप्त होती थी. लोकतंत्र में भरोसा करने वाला हर व्यक्ति कभी भी किसी की स्थाई सरकार नहीं चाहेगा क्योंकि यही लोकतंत्र की जान है. ममता बनर्जी 15 साल से पश्चिम बंगाल में थी. आज नहीं तो कल उन्हें भी बेदखल होना ही था परंतु इस तरह होंगी यह हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक सवाल है.अभी इसी वर्ष हमने बिहार में भी चुनाव देखे हैं. जहां सत्ता पक्ष ने प्रत्यक्ष रूप से महिलाओं के खाते में पैसे आवंटित कर मतदान के दौरान वोट खरीदने का कार्य किया था चाहती तो ममता भी ऐसा कुछ कर सकती थी लेकिन उन्होंने नैतिकता का दामन नहीं छोड़ा, और आज नैतिकता ने उन्हें खुद छोड़ दिया. शायद अरस्तु इसी दिन के लिए इशारा कर रहे थे, आज उनका कथन सत्य लग रहा है.
मैं बीजेपी और अमित शाह के रणनीति का दांद देना चाहूंगा. हम बीजेपी का कितना भी विरोध कर ले पर उनके चुनावी रणनीति का कोई जवाब नहीं है.2011 में बीजेपी पश्चिम बंगाल में शून्य पर थी. 2016 में उसने अपना खाता खोला, और 2021 में 77 सीटों के साथ विपक्ष में बैठी पर उसकी नजर पश्चिम बंगाल के सत्ता पर बनी रही और उसने अपने सारे अस्त्र इस्तेमाल किये आज परिणाम उसके सामने है. दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भी उनके लिए कुछ रास्ते खोलने का कार्य किया तभी वह यहां तक पहुंच पाई. 2011 और 2016 के चुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में अपनी सरकार बनाई थी. फिर 2021 में ममता को लगा कि अब हम कांग्रेस के बगैर भी सत्ता में आ सकते हैं और वह जीत भी गई. ममता बनर्जी को पूरा भरोसा था कि वह 2021 के परिणाम की पुनः पुनरावृत्ति करेंगी और कांग्रेस के बगैर अपनी सत्ता बचा पाएंगी . पर उन्होंने इतनी बड़ी भूल कैसे कर दी जहाँ बीजेपी जैसा शातिर विपक्षी हो जिसके पास ईडी सीबीआई, धन, संसाधन, मीडिया सबकुछ है उससे अकेले लड़ना उनके लिए कितना सुरक्षित रहेगा? उनका यही अति उत्साह उन्हें ले डूबा. लेकिन एक तरह से यह अच्छा भी हुआ 2029 की लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष में कोई मजबूत महिला नेता नहीं थी अब ममता बनर्जी को काफी वक्त मिलेगा 2029 की तैयारी के लिए साथ ही देश के उन सभी क्षेत्रीय पार्टियों के लिए भी एक संदेश होगा जो अपने राज्यों में दशकों से बीजेपी से अकेले लड़ रही है उन्हें भी अब समझना होगा कि यूं ही अकेले चलने से उन्हें सिकस्त के अलावा कुछ नहीं मिलने वाला.
तमिलनाडु की राजनीति ने हमेशा चौकाने का कार्य किया है. वहां सत्ता परिवर्तन होते रहता है. अच्छी बात है कि वहां की राजनीति मध्य भारत और पूर्वोत्तर की राजनीति से थोड़ी बेहतर है. तमिलनाडु के वर्तमान मुख्यमंत्री एम के स्टालीन इस बार तीसरे स्थान पर पहुंच गए है.तमिल अभिनेता विजय जिन्हें उनके प्रशंसक थलपति कहते हैं की नई पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) ने अपने परिणाम से सभी को चौका कर रख दिया है . विजय ने मात्र 2 साल पूर्व ही अपनी पार्टी का गठन किया था और आज वे मुख्यमंत्री के पायदान पर पहुँच चुके है.अंबेडकर पेरियार और धर्मनिरपेक्ष की राजनीति का दावा करने वाले विजय का अब देखना यह होगा कि वह तमिलनाडु को कौन सी दिशा देते हैं.
असम चुनाव में भाजपा द्वारा स्वच्छ किए गए हेमंत विश्वकर्मा पुनः मुख्यमंत्री बनने वाले हैं, वहीं केरल में यूडीएफ गठबंधन की सरकार बनने वाली है जिसमें कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और पुडुचेरी में बीजेपी ले दे करके किसी ने किसी तरह सरकार बनाने वाली है. इस प्रकार भाजपा आसाम, बंगाल और पुडुचेरी में अपना भगवा लहराने में कामयाब हो रही है, वहीं केरल के चुनाव में गठबंधन से सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस ने यह जता दिया है कि उसके बगैर बीजेपी का रथ रोकना आसान नहीं है. इस तरह से बीजेपी आज अपने दो राज्यों को बचाने के साथ-साथ बंगाल का किला भी अपने नाम करने में कामयाब हो चुकी है. आज देश के 70% विभाग पर बीजेपी का शासन है अब उसके सामने अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश का चुनाव है जिसकी तैयारी में मोदी जी लग चुके है .
अगर इस देश की राजनीति इसी तरह बढ़ती रही तो यकीन मानिए की लोकतंत्र की ताकत कहे जाने वाला विपक्ष सिर्फ नाम का ही रह जाएगा क्योंकि जिस प्रकार से हाल ही में आप के सात सांसदों को बीजेपी ने अपने पाले में खींच लिया हैं. इसके पहले भी वह कई राज्यों में सरकारे तोड़ चुकी है, विधायक खरीद चुकी है पार्टियों को तोड़ दिया है और मूक जनता सब देख रही है तो फिर भगवान ही बचाए इस देश को. बीजेपी ने एक बात सबके दिलों दिमाग में बैठा दी है कि मुस्लिम हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है इसके इतर आज देश की जनता को कुछ दिखाई नहीं दे रहा. कुछ ही महीनो में आप देखेंगे की टीएमसी के आधे नेता बीजेपी में शामिल हो जाएंगे. ममता अकेली रह जाएंगी और हो सकता है सरकार अगले लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें जेल में भी डाल दें. और यकीन मानिए यह सब कुछ बहुत ईमानदारी से होगा. अगर यही भारत का लोकतंत्र है तो फिर राजतंत्र क्या बुरा था? आज हम बांग्लादेश से भी कई मायनों में पीछे हो चुके हैं. शिक्षा की गुणवत्ता में हमें कोई विश्वास नहीं. हर रोज करोड़ों के पुल बह रहे हैं, आलीशान पार्टी कार्यालय बनाए जा रहे हैं पर अब भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है. बीजेपी के बड़े-बड़े नेता खुलेआम ऐयाशी करते पकड़े जा रहे हैं, थाने में दरोगा को झापड़ मार रहे हैं पर सब कुछ कायदे से हो रहा है. बलात्कार और लिंचिंग मीडिया में कहीं दिखाई नहीं दे रहा अब यह सोशल मीडिया का मामला रह गया है. रोजगार के तो क्या कहने पूरा परिवार मिलकर कमा रहा है भला इससे बेहतर और क्या चाहिए. मणिपुर जल रहा है पर इससे हमें क्या लेना देना आप झालमुड़ी खाईये. फ़िलहाल बीजेपी उत्तर प्रदेश के चुनाव की तैयारी में लग चुकी है आप गैस की लाइन में खड़े रहिए .