नागरिक श्रेणी के सिद्धांत से ख़त्म होंगी असमानता

 

 

    



(सोशल मीडिया साभार )

जाति आधारित अपराध, धार्मिक अपराध, धर्म परिवर्तन के नाम पर हिंसा. यह ऐसे अपराध है जो इस देश का पीछा नहीं छोड़ रहे. हमने इस देश को आगे बढ़ाने और दुनिया के साथ खड़े होने के लिए बहुत प्रयोग किये परंतु सफलता अभी भी हमारे आसपास नहीं दिखाई दे रहा है. हमने छुआछूत और अस्पृश्यता मिटाने के लिए दलित और आदिवासियों को आरक्षण दिया . इस आरक्षण की सुविधा को देखते हुए पिछड़ी जातियों ने  भी अपने हक अधिकार के लिए सरकार से सवाल किया नतीजन और उन्हें भी आरक्षण प्रदान किया गया. फिर समाज में मांग उठी की क्या सवर्ण गरीब नहीं है, तो हमने उनके लिए भी आरक्षण की व्यवस्था कर दी. पर सवाल अब भी वही का वही है  की क्या इससे समाज में फैली ऊंच नीच  की भावना मिट गई? समाज में समानता आ गई ? धार्मिक सुधारो और  उनके संरक्षण के लिए हमने अनेकों कमेटियां  बनाई पर आज भी अल्पसंख्यक धर्म तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिस पर सिर्फ और सिर्फ राजनीति ही की जा रही है. समाज के हर हिस्से का गरीब व्यक्ति समझ नहीं पा रहा है कि उसकी मूल समस्या क्या है. वह मंदिर मस्जिद और जाति की लड़ाई में उलझा हुआ है.शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार, न्याय और असमानता की समस्या उसकी जिंदगी को दिन प्रतिदिन नरकीय बना रही  हैं.
                                                        
(सोशल मीडिया साभार )

             आज देश जाति और धर्म की सड़ांध से बजबजा रहा है. सैकड़ो राजनीतिक पार्टियों हजारों समाज सुधारक संगठन जाति, धर्म के नाम पर अपनी- अपनी रोटियां सेक रहे है. जबकि इनसे देश का कभी उद्धार नहीं हुआ है. आज हर व्यक्ति अपने धर्म और जाति पर बेवजह गर्व करके एक दूसरे को नीचा दिखाने का कार्य कर रहा है. हम सब जानते है  सबके इतिहास धूमिल हैं. यह लोग कालांतर में ना कभी मिलकर एक साथ रहे थे ना भविष्य  में एक दूसरे के साथ मिलकर रहेंगे. गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी पुस्तक राष्ट्रवाद में लिखा है कि भारत और एशिया की समस्या यह है कि वह कभी अपने अतीत से बाहर नहीं निकलना चाहता. ऐसा इसलिए है क्योंकि सब के अतीत शर्मिंदगी और नकारापन से भरे हुए हैं फिर भी सभी अपने लिए झूठा गर्व ढूढ़ लाते है . अगर सब लोग इतने ही महान थे तो हजारों साल तक यह देश अनेक विदेशी आक्रांताओं का गुलाम क्यों रहा ? आज देश आजाद है , सारी शक्ति अपने हाथ में है पर लगता है जैसे समस्याएं और बढ़ती जा रही है. हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, देशभक्त राजनेताओं और विद्वान युग पुरुषों ने हमारे मुल्क को समृद्ध और एक साथ रहने के लिए एक महान संविधान बना कर दिया परन्तु  हम  आज भी एक दुसरे से लड़ते आ रहे हैं.

                                                                                      (सोशल मीडिया साभार )

आज देश में विवाद के तीन प्रमुख विषय है .आरक्षण, जाति ,और पारंपरिक सत्ता .इसलिए वक्त आ गया है इनके समूल विनाश का .एक ऐसी व्यवस्था निर्मित करने की आवश्यकता है जो इन सब का अंत करके एक समृद्ध भारत का स्वप्न पूर्ण कर सके . अतः जरुरत है देश के सभी नागरिकों को आर्थिक आधार पर पहचान देने की ,एक ऐसी पहचान जिसमे किसी के  कुल ,धर्म ,जाति ,लिंग ,क्षेत्र का कोई महत्त्व नहीं होगा . भारत के सभी नागरिकों को आर्थिक आधार पर चिन्हित कर उनके विकास के लिए योजनाएं निर्मित होंगी और समय – समय पर उनमे संशोधन होता रहेगा . बाबा साहब ने देश की जाति समस्या पर कहा था कि ‘ वर्ण व्यवस्था एक ऐसी बहु मंजिला ईमारत की तरह है जिसमे कोई सीढ़ी नही है , जो जिस मंजिल पर पैदा होगा उसे वही मरना है .ना कोई ऊपर जा सकता है ना ही कोई नीचे आ सकता है’ .  परन्तु इस नागरिक श्रेणी में साल – दर साल में श्रेणी की स्थिति में जरुरत परिवर्तन होगा .जो जैसा परिश्रम करेगा वह वैसी श्रेणी में पहुंचेगा . इस नागरिक श्रेणी का एक परिकल्पित उदाहरण  स्वरुप मैंने निर्मित किया है –

 

श्रेणी 1

ऐसे नागरिक जिनकी सम्पत्ति एक अरब से अधिक हो

श्रेणी 2

पचास करोड़ से एक करोड़ तक

श्रेणी 3

एक करोड़ से पचास लाख तक

श्रेणी 4

पचास लाख से दस लाख तक

श्रेणी 5

दस लाख से नीचे –                    आरक्षण                                                                         

5.1 –दस लाख से पांच लाख तक   05%                                                              

5.2 – पांच लाख से तीन लाख तक                                                                 
10 %

5.3 – 3  लाख से 1  लाख तक                                                                           15 %

5.4–एकलाखसे नीचे                           25%

 

             

श्रेणी 5 में आने वाले नागरिकों को समाज की मूलधारा में लाने हेतु  सरकार का पूरा ध्यान होना चाहिए . इन्हें ही  आरक्षण , मुफ्त शिक्षा ,स्वास्थ्य ,रोजगार सहित सभी सुविधाओं में सामान अवसर प्रदान करने की व्यवस्था दी जानी चाहिए .भारत के सभी नागरिकों को सम्पत्ति में हिस्सा, सुविधा यहां तक कि रेलवे और हवाईजहाज की  यात्रा में छूट भी इसी आधार पर प्रदान होना चाहिए . नागरिक श्रेणी के पहचान के तौर पर पांच प्रमुख  रंग के प्रमाण पत्र ही नागरिकों के पहचान होंगे ,इसके अतिरिक्त (कुल ,धर्म ,जाति ,लिंग ,क्षेत्र ) उनकी कोई पहचान नही होगी.पहला  सफ़ेद दूसरा पीला तीसरा हरा और चौथा  नीला तथा पांचवा लाल कार्ड बना होगा . हम जानते है गांव में आज भी बस्तीयां होती हैं. पाठक बस्ती, मिसिर बस्ती, यादव बस्ती, चमार बस्ती, नाई बस्ती, जोलहा बस्ती, पंजाबी टोला , मल्लाह बस्ती, इत्यादि जो की जाति पोषक हैं. इसे समाप्त करना हैं तो कॉलोनी बनानी होगी. ए ब्लॉक, ब ब्लॉक जहां जाति धर्म के नाम पर लोग बिखरे नहीं होंगे.

          जाति,मजहब के नाम पर कही कोई सामाजिक-राजनीतिक संगठन नहीं होगा ( वैवाहिक विज्ञापन matrimonial तक में भी इनका जिक्र नहीं होना चाहिए ) किसी दुकान,मकान पर इनका इस्तेमाल नहीं होगा. टोपी, पगड़ी, चोटी लगाना अपराध नहीं होगा पर इसे धार्मिक प्रतिक नहीं माना जाएगा .अगर इनके प्रतिक के आधार पर कोई सामाजिक, राजनीतिक, संगठन बनाता हैं, दुकान मकान पर तस्वीर लगाता हैं तो यह अपराध माना जाएगा . स्कूल, संसद और कोर्ट में यह निषिद्ध होगा. शिक्षा, नौकरी, राजनीति,ठेका, सरकारी योजना इन सब कों आर्थिक आधार पर आरक्षित रखा जाएगा.किसी के पूर्वजों की जाति पूछना जघन्य अपराध होगा. अतः भारत को विकसित होना है. दुनिया से आगे निकलना है. अपने सभी सामाजिक बुराइयों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ना हैं तो एक बार इस प्रकार से सोचने की आवश्यकता है.

  देश को हमे ऐसे राजनीतिज्ञों के हाथों में बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए जो हमें सिर्फ धर्म और जाति के चश्मे से देखते हैं, क्योंकि हम चाहे कितनी भी दुनिया – जहां की बाते कर ले  भूखे पेट को सिर्फ रोटी ही शांत कर सकती है और इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

 

 

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