हमारे प्रधानमंत्री खुद की मां पर पड़ी गाली से विलख पड़े हैं. अब मुख्य धारा की मीडिया का यही मुद्दा है. विपक्ष और राहुल गांधी ने वोट चोरी का मुद्दा जिस दमखम से बिहार चुनाव में उठाया है उससे सरकार बिल्कुल घिरी हुई है. पर विपक्ष के एक जनसभा में किसी साधारण व्यक्ति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी जी की मां को गाली देना किसी भी स्तर से अशोभनीय है. मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं और जिस किसी भी व्यक्ति ने ऐसी जुर्रत की है उसे कानून के हवाले करने की मांग रखता हूं. अब सवाल यह है की क्या इन गाली गलौज के बीच बिहार एक बार फिर मूक बना रहेगा, और उसके सामाजिक मुद्दे गायब कर दिए जाएंगे? बिहार की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है. क्योंकि यहां स्पष्ट रूप से कभी भी सरकार बनना आसान नहीं होता. और हर पंचवर्षीय राजनीति में नया गठबंधन, नई पार्टी , नई विचारधारा इसमें प्रवेश करके इसे और उलझाने का काम करती रहती है.
इस बार बिहार का चुनाव पहलगांव में हुए हमले से जोर पकड़ता है. आप सबको याद होगा हमले के बाद प्रधानमंत्री जी अपना विदेशी दौरा रद्द करके तुरंत भारत लौटते है.पूरे देश को उनके वापस लौटने से ऐसी आशा होती है कि वह तत्काल पहलगांव जाएंगे और पीड़ितों से मिलेंगे.पर हर हर बार की तरह इस बार भी वें निराश करते हैं. इस बार भी उन्होंने बता दिया कि उनके लिए देश बाद में और चुनाव पहले है. अब जब विपक्ष ने बेरोजगारी,भ्रष्टाचार,पलायन मतदान चोरी का मुद्दा मजबूती से देश के सामने रखा है तब उनके हाथ गलती से उनकी मां की गाली का दर्द लग गया है जिसके नीचे वें बिहार के सभी मुद्दों को दबा देना चाहते हैं. आज उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग बेरोजगारी एवं पलायन के दर्द से कराह रहें हैं, परन्तु उनकी समस्या का सरकार के पास कोई हल नहीं है. इन दोनों राज्यों के लोग अपना परिवार पालने के लिए बरसों से दिल्ली, महाराष्ट्र,बेंगलुरु, कोलकाता,गोवा तथा चेन्नई जैसे घनी आबादियों में अपने सपनों को मारते हुए चंद पैसों की खातिर इन शहरों में बद से बत्तर जीवन जीने के लिए विवश हैं. भाजपा के लिए बेरोजगारी और पलायन कोई समस्या नहीं हैं. आप सबको याद दिलाना चाहूंगा कि जब मायावती उत्तर प्रदेश में अपनी सत्ता के दौरान लखनऊ को तंग गलियों से निकाल कर उसे खूबसूरत शहर बनाने में लगी हुई थी, प्रदेश की राजधानी को उन्होंने कई ऐसे पार्क दिए जो आज प्रदेश ही नहीं देश और विदेश की भी शान है. उन्होंने देश के उन महापुरुषों कों एक शहर में समेटने का प्रयास किया जिससे यह शहर और देश के महापुरुष दोनों अमर हो जाए तो उस वक्त विपक्ष में बैठें समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बेफिजूल मूर्तियों पर पैसे खर्च करने के लगातार ताने दिए जिसे मीडिया ने बहुत बड़ा मुद्दा बनाया था . तब भारतीय जनता पार्टी ने इस विकास कों फिज़ूल खर्च का नाम दिया था और इसके बदले उत्तर प्रदेश के युवाओं को पलायन से रोकने के लिए प्रदेश में अनेकों फैक्ट्री खोलने के सुझाव दिए थे, आज प्रदेश में कितने फैक्ट्री है जिससे युवाओं को नौकरी मिल रही है? क्या किसी मीडिया ने यह सवाल आज योगी जी से पूछने कोशिश की हैं?
आप सभी को याद दिलाना चाहूंगा की किसी भी राज्य में जब-जब चुनाव होने वाला होता है भारतीय जनता पार्टी वहां के स्थानीय मुद्दों को एकदम से गायब कर देती है. इसके बदले वह हिंदू मुस्लिम का कोई नया ड्रामा फैला देगी, बाबर और अकबर को लड़ा देंगे. कुछ नहीं मिला तो किसी व्यक्तिगत हमले में लोगों को उलझा देंगे और हमारा विपक्ष भी इनके प्रोपगंडा के जाल में बस फंस जाता है. बिहार राज्य सालों से बाढ़ से जूझता रहा है. यह यहां की सबसे बड़ी समस्या है. मैं पूछता हूं पक्ष या विपक्ष किसी भी बड़े नेता ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश की है? पलायन,महंगी शिक्षा,गुंडागर्दी तथा भ्रष्टाचार यहां हमेशा से जड़े जमाए हुए है और इन्हीं मुद्दों को मोदी जी गायब करने में लगे हुए हैं. आज बिहार से उसके स्थानीय मुद्दे गायब किए जा रहे हैं अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में भी यही खेल होने वाला है. लेकिन जनता को अपने स्थानीय मुद्दे नहीं भूलना चाहिए.
अंत में यही कहना चाहूंगा कि जब मणिपुर में एक बहन को नंगा घुमाया गया. हाथरस कांड में मनीषा की चीख कों दबा दिया गया तब मोदी जी कहां थे?क्या यें महिलाएं आपकी कुछ नहीं लगती. आपको यह समझना होगा की बहन बेटी चाहे प्रधानमंत्री की हो या फिर एक साधारण व्यक्ति की सबका मान और अपमान एक होता है. जब वह मणिपुर पर चुप थे तो अब क्यों चीख रहे हैं.