जैसा कि अब जाति जनगणना आरंभ होने वाली है और इसका प्रारूप भी तैयार किया जा रहा है. देशभर में सालों से अनेक जातियों एवं धर्म तथा संप्रदाय के लोग अपने समाज के लिए एक नए विकल्प की मांग करते रहें हैं. इसलिए आवश्यक है कि इन बिंदुओं को ध्यान में रख करके जाति जनगणना की जाय.
1. देश के सभी आदिवासी समाज के लोग आज अपने संस्कृति को बचाने के लिए कई वर्षों से अपने लिए एक अलग धर्म विकल्प की मांग कर रहे हैं. इस ओर ध्यान देते हुए इस समाज के जागरूक और समाजसेवी लोगों से उनकी सलाह पर धर्म के विकल्प में उनके अनुरूप धर्म का विकल्प जोड़ा जाए. साथ ही कुछ नए धर्म का विकल्प भी इस जनगणना में शामिल हो जैसे पंजाब प्रान्त से रविदासिया धर्म की मांग इत्यादि.
2. अनुसूचित जातियों के लिए जाति प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्हें हरिजन जाति के नाम से प्रमाण पत्र दिया जाता है जिसका विरोध आदरणीय बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी, मान्यवर कांशीराम,मायावती, सहित अनेक दलित समाज के नेताओं ने भी किया है. अतः इस संदर्भ में मेरा अनुरोध है कि हरिजन शब्द के स्थान पर भीमजन, दलित, अथवा वीर जाति का विकल्प किया जाए.
3. भारत जातियों का देश है लेकिन यहां कई ऐसी जातियां हैं जिनके नाम अभद्र है जिससे इन जातियों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है.अतः इस दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखते हुए समाजशास्त्रियों से व्यापक अध्ययन करके इसमें भी सुधार किया जाए जिससे कि इन जातियों के स्वाभिमान कों आत्मबल मिल सके.